Bewafa Shayari, Raat ki gehrai

रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई|

Bewafa Shayari, Samet kar le jao

समेट कर ले जाओ..
अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से..
अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर..
इनकी ज़रूरत पड़ेगी।

Samet Kar Le Jao..
Apne Jhoothe Waadon Ke Adhure Kisse..
Agli Mohabbat Me Tumhein Phir..
Inki Zarurat Padegi..

Bewafa Shayari, Kya aajeeb si

क्या अजीब सी ज़िद है..
हम दोनों की,
तेरी मर्ज़ी हमसे जुदा होने की..
और मेरी तेरे पीछे तबाह होने की..